देहरादून। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर देहरादून में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि मामले की जांच पूरी होने तक इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत सहित कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने लोकभवन पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
कथित वीआईपी की भूमिका स्पष्ट करने की मांग
कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। पार्टी ने मामले की जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जांच की प्रगति सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
पार्टी ने दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का तर्क है कि कथित वीआईपी प्रकरण की जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, मामले में किसी व्यक्ति की कथित भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
2022 में हुई थी अंकिता की हत्या
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। मई 2023 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हालांकि, हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी पहलू की जांच की मांग को लेकर मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि अंकिता को न्याय दिलाने और कथित वीआईपी प्रकरण से जुड़े सवालों के जवाब पाने के लिए उसका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, इस मामले में सामने आने वाले आरोपों और दावों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।
