पौड़ी। उत्तराखंड में भू कानून के उल्लंघन के आरोपों के बीच पौड़ी गढ़वाल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोट ब्लॉक के सफदरखाल क्षेत्र स्थित एटाड़ी गांव में प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय लोगों की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य बंद कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक दिल्ली स्थित रियल एस्टेट कंपनी पर स्थानीय व्यक्ति के साथ मिलकर उत्तराखंड के भू कानून का उल्लंघन करते हुए करीब 145 नाली कृषि भूमि खरीदने का आरोप है। बताया जा रहा है कि इनमें से 122 नाली भूमि की रजिस्ट्री पहले ही हो चुकी है। आरोप है कि कंपनी ने मौके पर पहुंच मार्ग का निर्माण भी शुरू कर दिया था और वहां आवासीय फ्लैटों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों वाली टाउनशिप विकसित करने की तैयारी की जा रही थी।

स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इस परियोजना पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग उत्तराखंड के भू कानून की भावना के विपरीत है। साथ ही यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में स्थानीय लोगों के माध्यम से जमीन खरीदकर कानून की कमियों का लाभ उठाया जा रहा है, जिससे पहाड़ों की कृषि भूमि और स्थानीय हित प्रभावित हो रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने एसडीएम, एडीएम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाकर विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। समिति यह जांच करेगी कि भूमि खरीद-फरोख्त नियमानुसार हुई या नहीं, भू कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है या नहीं तथा बिना अनुमति के किसी प्रकार का व्यावसायिक निर्माण तो नहीं किया गया।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित भूमि सौदे को निरस्त करने के साथ-साथ परियोजना से जुड़े सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद राज्य में लागू भू कानून की प्रभावशीलता और उसके क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच भविष्य में ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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