Passing out parade of IMA : देश की आन-बान-शान देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में आज पासिंग आउट परेड का आयोजन हुआ, जिसमें 491 जेंटलमैन कैडेट्स ने शानदार प्रदर्शन किया। नेपाल के सेना अध्यक्ष अशोक राज सिंग्डेल ने परेड की सलामी ली। इस आयोजन के बाद भारतीय सेना को 456 नए अधिकारी और मित्र राष्ट्रों को 35 कैडेट्स मिले।

भारतीय सैन्य अकादमी का इतिहास
भारतीय सैन्य अकादमी की स्थापना 1 अक्टूबर 1932 को अंग्रेजों ने की थी। उस समय केवल 40 कैडेट्स ही पास आउट हुए थे। यह अकादमी भारत ही नहीं, म्यांमार और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष भी तैयार कर चुकी है। प्रारंभ में ब्रिगेडियर एलपी कोलिंस IMA के पहले कमांडेंट बने और पहला बैच, जिसे पायनियर कहा गया, में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, म्यांमार के सेनाध्यक्ष स्मिथ डन और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष मोहम्मद मूसा शामिल थे।

प्रमुख बदलाव और विकास
1947 में ब्रिगेडियर ठाकुर महादेव सिंह पहले भारतीय कमांडेंट बने। 1949 में इसका नाम सुरक्षा बल अकादमी रखा गया और क्लेमेनटाउन में एक शाखा खोली गई, जिसे बाद में नेशनल डिफेंस अकेडमी (NDA) के रूप में जाना गया। 1960 में इसका नाम पुनः बदलकर भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) रखा गया। 1962 में राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने इसे ध्वज प्रदान किया।

अकादमी के संग्रहालय की अनमोल वस्तुएं
IMA के म्यूजियम में पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाजी की पिस्तौल और पाकिस्तानी ध्वज रखा है, जो 1971 के युद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुएं हैं। ये वस्तुएं भावी सैन्य अफसरों में जोश भरने का कार्य करती हैं।

प्रमुख हस्तियों की सलामी
1956 से 2021 तक, देश के आठ राष्ट्रपति पासिंग आउट परेड की सलामी ले चुके हैं, जिनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम और राम नाथ कोविंद शामिल हैं।

इस तरह, भारतीय सैन्य अकादमी ने अपने गौरवशाली इतिहास और निरंतर विकास के साथ भारतीय सेना को मजबूत और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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