देहरादून। उत्तराखंड एकता मंच ने दावा किया है कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि, रोजगार, पलायन, संसाधनों के संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान पाँचवीं अनुसूची और ट्राइब स्टेटस के माध्यम से संभव है। यह बात मंच ने रविवार को देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही।
प्रेस वार्ता का आयोजन मंच की “एकजुट-एकमुट यात्रा” के समापन अवसर पर किया गया। मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि 4 जून से 22 जून तक चली यह यात्रा खटीमा से शुरू होकर चम्पावत, लोहाघाट, पिथौरागढ़, गंगोलीहाट, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी सहित कई पर्वतीय क्षेत्रों से होकर गुजरी। यात्रा के दौरान लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को जाना गया।
मंच के अनुसार, यात्रा के दौरान रोजगार और पलायन सबसे प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने आए। प्रतिनिधियों का कहना था कि यदि जल, जंगल, जमीन, स्थानीय संसाधनों, संस्कृति और पारंपरिक अधिकारों को कानूनी संरक्षण देना है, तो पाँचवीं अनुसूची और ट्राइब स्टेटस प्रभावी संवैधानिक व्यवस्था साबित हो सकते हैं। मंच ने कहा कि पाँचवीं अनुसूची लागू होने पर पेसा अधिनियम, 1996 के तहत ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिलेंगे और स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी।
उत्तराखंड एकता मंच ने प्रदेशवासियों से इस विषय पर व्यापक जनचर्चा और अध्ययन करने की अपील की। साथ ही घोषणा की कि आने वाले महीनों में पूरे प्रदेश में जनसभाएं और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसी क्रम में 22 नवंबर 2026 को देहरादून के परेड ग्राउंड में एक विशाल जनसभा आयोजित करने की योजना है, जिसमें मुख्यमंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया जाएगा।
