देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में पार्टी ने ‘समरसता संकल्प अभियान’ शुरू करने की रणनीति बनाई है। अभियान का मुख्य उद्देश्य दलित समाज के बीच पहुंच बढ़ाना, केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, अभियान के तहत भाजपा कार्यकर्ता राज्यभर में दलित बहुल क्षेत्रों में जनसंपर्क करेंगे। इस दौरान सामाजिक संवाद, चौपाल, बैठकें और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों, कल्याणकारी योजनाओं और संगठन की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना जाएगा। पार्टी का मानना है कि समाज के सभी वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने से संगठन और अधिक मजबूत होगा।

भाजपा नेतृत्व का कहना है कि समरसता संकल्प अभियान केवल चुनावी गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समावेशिता को बढ़ावा देने का प्रयास है। अभियान के दौरान वरिष्ठ नेताओं के साथ जनप्रतिनिधि और संगठन पदाधिकारी भी विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे। इसके अलावा बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई है, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ पाने वाले लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया जा सके।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में भाजपा का समरसता संकल्प अभियान चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी महीनों में इस अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का उद्देश्य सामाजिक समरसता के संदेश के साथ संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और सभी वर्गों के बीच अपनी पहुंच को और व्यापक बनाना है।

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