देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के 26वें वर्ष के अवसर पर प्रदेश के छह साहसी बच्चों को मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शुक्रवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित राज्योत्सव समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन बच्चों को सम्मानित किया। इन बच्चों ने कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया है।

राज्य सरकार की ओर से पहली बार मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की राज्य स्तरीय चयन समिति ने प्रदेश के चार जिलों से प्राप्त आठ प्रस्तावों की समीक्षा के बाद छह बच्चों का चयन किया था। चयनित बच्चों में चमोली जिले की दिव्या, दीपिका और आरव सिंह, चंपावत की माया कांडपाल, देहरादून की आराध्या और टिहरी गढ़वाल की श्वेता शामिल हैं।

इन बच्चों ने अलग-अलग घटनाओं में साहस और मानवता की मिसाल पेश की है। चंपावत की 17 वर्षीय माया कांडपाल ने अगस्त 2025 में उफनती नदी में कूदकर अपनी दो सहेलियों की जान बचाई थी। तेज बहाव में बह रही दोनों छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकालने के दौरान माया खुद भी घायल हो गई थीं। उनके इस साहसिक कार्य की काफी सराहना हुई थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश के बहादुर बच्चों को राज्य स्तर पर सम्मानित करने के लिए इस पुरस्कार की घोषणा की थी। इसके बाद कैबिनेट ने मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना को मंजूरी दी थी। योजना का उद्देश्य बच्चों में साहस, आत्मविश्वास, परोपकार और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है।

योजना के तहत असाधारण वीरता दिखाने वाले बच्चों को 51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और पदक देने का प्रावधान है। इसके लिए वीरता की घटना के समय बच्चे की उम्र छह वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।

राज्य सरकार की इस पहल से उन बच्चों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में दूसरों की मदद कर समाज के सामने साहस और मानवता की मिसाल पेश की है।

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