चमोली। बदरीनाथ धाम में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। धाम के अराइवल प्लाजा में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में तेज संगीत और कलाकारों की प्रस्तुतियों को लेकर संतों, तीर्थ पुरोहितों और कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि चारधाम में शामिल बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए इस तरह के आयोजनों के स्वरूप और स्थान पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना की ओर से आयोजित दो दिवसीय देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन 19 सितंबर से बदरीनाथ में किया गया था। कार्यक्रम की थीम ‘Our Heritage, Our Future’ रखी गई थी। इसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति, वेशभूषा, व्यंजन और सेना के शौर्य से जुड़ी प्रस्तुतियां भी शामिल रहीं। कार्यक्रम में लोक गायक किशन महिपाल और गायिका प्रियंका महर ने प्रस्तुति दी। सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद इसको लेकर विरोध शुरू हुआ।

उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि आपत्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर नहीं, बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। उनका कहना है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने तेज ध्वनि और संगीत से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई।

वहीं, ज्योतिर्मठ के स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरि ने भी कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांस्कृतिक उत्सव के दौरान धाम की धार्मिक परंपराओं और मर्यादा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनके अनुसार बदरीनाथ धाम का धार्मिक स्वरूप अन्य स्थानों से अलग है, इसलिए यहां होने वाले आयोजनों की प्रकृति भी उसी अनुरूप होनी चाहिए।

विवाद के बीच संतों और तीर्थ पुरोहितों ने मांग की है कि भविष्य में बदरीनाथ धाम में होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों के लिए धार्मिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

 

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