ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सेटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े की जांच अब एम्स में काम कर रही आउटसोर्स एजेंसी तक पहुंच गई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में आउटसोर्स एजेंसी के मैनेजर समेत कुछ लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पुलिस ने मामले में भाई-बहन और एम्स के आउटसोर्स कर्मचारी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
मामला किच्छा में निर्माणाधीन एम्स सेटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से रकम लेने से जुड़ा है। आरोपियों पर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर नौकरी का झांसा देने का आरोप है। एम्स प्रशासन के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नर्सिंग ऑफिसर और एमटीएस पद के दो फर्जी नियुक्ति पत्र तथा दो लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि इस पूरे मामले में एम्स में काम कर रही आउटसोर्स एजेंसी राजदीप इंटरप्राइजेज की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में एजेंसी के मैनेजर विनायक और शिवा नाम के व्यक्ति की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बताया गया है कि शिवा पूर्व में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से एम्स में काम कर चुका है। वहीं मुख्य आरोपियों में शामिल दीपक गुसाईं वर्तमान में एम्स की आयुष्मान योजना में आउटसोर्स के माध्यम से तैनात बताया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने और उन पर मुहर लगाने की प्रक्रिया में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी। जांच में यह पहलू भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपियों ने केवल फर्जी नियुक्ति पत्र देकर लोगों से रकम वसूली या किसी स्तर पर वास्तविक नियुक्ति के नाम पर भी पैसे लिए गए। हालांकि, इस संबंध में पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
मामले में पुलिस की जांच जारी है और आउटसोर्स एजेंसी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।
