देहरादून। उत्तराखंड में जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण को लेकर चल रहे असमंजस के बीच प्रदेशवासियों को राहत मिली है। राज्य में फिलहाल एक साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु पंजीकरण के मामलों में एसडीएम ही आदेश जारी करते रहेंगे। केंद्र सरकार की ओर से पंजीकरण की प्रक्रिया में किए गए नए बदलाव अभी उत्तराखंड में लागू नहीं हुए हैं। नए नियम प्रदेश में अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होंगे।
दरअसल, केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत एक साल से अधिक लेकिन दो साल के भीतर की देरी से होने वाले जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। वहीं, दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के आदेश की आवश्यकता होगी।
हालांकि, उत्तराखंड में इन नए प्रावधानों को लागू करने के लिए अभी राज्य स्तर पर अधिसूचना जारी नहीं हुई है। निदेशक नागरिक पंजीकरण की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अधिसूचना जारी होने तक पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी। इसके तहत एक साल से अधिक विलंब वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण के मामलों में एसडीएम स्तर से ही अनुमति दी जाएगी।
इस बीच दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अनिवार्यता को लेकर पर्वतीय क्षेत्रों में विरोध भी सामने आया है। चकराता क्षेत्र के ग्रामीणों ने हाल ही में धरना-प्रदर्शन कर प्रक्रिया को सरल बनाने और एसडीएम को ही पूर्व की तरह अनुमति देने का अधिकार देने की मांग की थी। ग्रामीणों का कहना था कि दुर्गम क्षेत्रों से न्यायालय तक पहुंचना लोगों के लिए समय और आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है।
जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र सरकारी योजनाओं, शिक्षा, पेंशन, बैंकिंग, बीमा और उत्तराधिकार जैसे कई जरूरी कार्यों में उपयोगी होते हैं। ऐसे में राज्य में नई व्यवस्था लागू होने तक पुराने नियमों के तहत पंजीकरण प्रक्रिया जारी रहने से लोगों को फिलहाल राहत मिलेगी।
