देहरादून। उत्तराखंड में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) द्वारा संचालित सौर ऊर्जा परियोजनाओं में देरी और प्रगति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग ने UREDA से सभी लंबित परियोजनाओं की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट, कार्य प्रगति और देरी के कारणों का पूरा ब्योरा तलब किया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी और कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, राज्य में वर्षों पहले आवंटित कई सौर ऊर्जा परियोजनाएं अब तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। आयोग ने पाया कि अनेक परियोजनाओं में तय समयसीमा के बावजूद अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। कुछ परियोजनाओं में भूमि, तकनीकी स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया, जबकि कई मामलों में परियोजना डेवलपर्स की ओर से भी कार्य में सुस्ती देखने को मिली। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना ठोस कारणों के लगातार समय बढ़ाना उचित नहीं माना जा सकता।

UERC ने UREDA को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति, डेवलपर द्वारा किए गए कार्य, लंबित बाधाएं और भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाए। आयोग यह भी जांच करेगा कि किन परियोजनाओं में वास्तविक प्रगति हुई है और किन मामलों में अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर आवंटन निरस्त करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2027 तक राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और उनकी नियमित निगरानी करना बेहद आवश्यक है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रभावी निगरानी से ही राज्य स्वच्छ ऊर्जा के अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकेगा। फिलहाल UREDA आयोग के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तैयारी में जुटा है, जिसके बाद पूरे मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी।