हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष ने हरिद्वार में मदरसा संचालकों के साथ बैठक कर नए पंजीकरण और मान्यता संबंधी नियमों की विस्तृत जानकारी दी। बैठक का उद्देश्य राज्य में लागू नई व्यवस्था के तहत सभी मदरसों का समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित करना और उन्हें निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुरूप संचालित करना था। अधिकारियों ने संचालकों से ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।
बैठक के दौरान प्राधिकरण अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड में नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों, विशेषकर मदरसों, को निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकरण कराना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजीकरण का उद्देश्य संस्थानों को बंद करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जवाबदेह बनाना है। साथ ही संस्थानों को राज्य के शैक्षणिक मानकों के अनुरूप विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
मदरसा संचालकों ने बैठक में पंजीकरण प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और मान्यता से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर अपने सवाल रखे। प्राधिकरण की ओर से अधिकारियों ने इन सभी प्रश्नों का समाधान करते हुए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और मान्यता के लिए अपनाई जाने वाली औपचारिकताओं की जानकारी दी। बैठक में यह भी कहा गया कि समय सीमा के भीतर आवेदन करने वाले संस्थानों को नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने में हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत सभी पात्र संस्थानों का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से तैयार किया जाएगा, जिससे निगरानी और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी। बैठक के अंत में मदरसा संचालकों से अपील की गई कि वे निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार तथा प्राधिकरण के साथ समन्वय बनाए रखें। प्राधिकरण का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है।
