देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क बंद होने और दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित प्रसूति सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। विभाग ने सभी जिलों, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधिकारियों को हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान कर समय रहते उन्हें अस्पतालों के निकट सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आशा कार्यकर्ता (ASHA), एएनएम और चिकित्सा टीमों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार की गई है। जिन महिलाओं की डिलीवरी की संभावित तिथि मानसून के दौरान है, विशेषकर हाई-रिस्क गर्भावस्था वाले मामलों में, उन्हें प्रसव से लगभग 10 से 15 दिन पहले ही नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में ठहराने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य खराब मौसम के कारण किसी भी आपात स्थिति में इलाज या प्रसव में देरी न होने देना है।

स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन के सहयोग से अस्पतालों के आसपास रहने, भोजन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एंबुलेंस सेवाओं, आपातकालीन चिकित्सा दलों और रेफरल व्यवस्था को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी परिस्थिति में गर्भवती महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। विभाग लगातार जिलों से रिपोर्ट लेकर तैयारियों की निगरानी कर रहा है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें और मौसम खराब होने की स्थिति में अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय समय रहते अस्पताल पहुंचें। विभाग का कहना है कि यह पहल मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और मानसून के दौरान सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली किसी भी गर्भवती महिला को खराब मौसम के कारण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न होना पड़े।

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