देहरादून में चम्पावत की नाबालिग से कथित गैंगरेप मामले और उसके बाद सामने आए घटनाक्रम को लेकर शुक्रवार को गांधी पार्क में उत्तराखंड महिला मंच और अन्य सामाजिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले को संदिग्ध बताते हुए बीजेपी नेताओं पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए बच्चियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान महिला मंच की कमला पंत ने कहा कि राज्य सरकार लगातार अपने लोगों को बचाने की कोशिश करती रही है। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि आज तक वीआईपी का खुलासा नहीं हो पाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस बच्ची को पुलिस ने कथित तौर पर कमरे में निर्वस्त्र और रस्सियों से बंधा पाया, उसी मामले को कुछ घंटों में फर्जी कैसे घोषित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता और उसके पिता को न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने के बजाय नजरबंद किया गया और मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि यदि पुलिस की कहानी को सही भी मान लिया जाए, तब भी यह गंभीर सवाल है कि राजनीतिक लड़ाई में नाबालिग बच्चियों का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है और इसमें शामिल लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में महिला अपराधों में कई बीजेपी नेताओं के नाम सामने आए हैं।

उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट ने कहा कि पुलिस जिस व्यक्ति को साजिशकर्ता बता रही है, वह पहले भी नाबालिग दुष्कर्म मामले में जेल जा चुका है और हाईकोर्ट से रिहा हुआ था। उस समय पुलिस ने मामले को फर्जी नहीं बताया था।

प्रदर्शन में ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, सुजाता पॉल, स्वाति नेगी, विमला कोली, गीतिका, ऊमा भट्ट, विजय भट्ट और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने राज्य में बढ़ते महिला अपराधों पर चिंता जताते हुए न्याय और पारदर्शी जांच की मांग की।