देश में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच जालसाज अब भारतीय रेलवे से जुड़े पेंशनभोगियों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामलों के सामने आने के बाद रेलवे ने विशेष एडवाइजरी जारी कर पेंशनभोगियों से सतर्क रहने की अपील की है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी फोन, व्हाट्सएप, एसएमएस या सोशल मीडिया के माध्यम से बैंक विवरण, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी नहीं मांगता।
रेलवे ने बताया कि पीपीओ अपडेट, केवाईसी वेरिफिकेशन या अतिरिक्त पेंशन लाभ का झांसा देकर मांगी जा रही जानकारी पूरी तरह फर्जी है। सेवा रिकॉर्ड या पीपीओ संशोधन के नाम पर भेजे गए किसी भी लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी गई है। पेंशनभोगियों से कहा गया है कि वे अपने परिवार के सदस्यों को भी इस तरह की धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत साइबर सेल और संबंधित प्रशासनिक कार्यालय को दें।
राज्यसभा में प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वर्ष 2025 में ट्रेन टिकट बुकिंग से जुड़ी 3.03 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी निष्क्रिय की गई हैं। दिसंबर 2025 तक पिछले छह महीनों में 6,043 करोड़ मैलिशियस बॉट रिक्वेस्ट ब्लॉक की गईं।
इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर संदिग्ध टिकट बुकिंग से जुड़ी 3.99 लाख प्रविष्टियों की जांच में 376 शिकायतें दर्ज की गईं और 12,819 संदिग्ध ईमेल डोमेन ब्लॉक किए गए। तत्काल टिकट बुकिंग में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए आधार आधारित ओटीपी सत्यापन प्रणाली भी लागू की गई है।
