देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड में निकाली गई अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी नेतृत्व की ओर से भेजे गए पत्र पर अपना पक्ष रखा। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक एकजुटता और वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल को लेकर यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दरअसल, हरीश रावत ने हाल ही में उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा निकाली थी। इस यात्रा के तहत उन्होंने जसपुर, काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी सहित विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से संवाद किया। रावत का कहना था कि इस पहल का उद्देश्य जनता से सीधे जुड़ना और प्रदेश में कांग्रेस संगठन को सक्रिय करना है।

हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उनकी इस यात्रा पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने हरीश रावत को पत्र लिखकर कहा था कि पार्टी संगठन की अनुमति के बिना अलग से कार्यक्रम आयोजित करना उचित नहीं है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी वरिष्ठ नेताओं से सामूहिक रूप से पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेने और एकजुट होकर काम करने की अपेक्षा की थी।

 

यात्रा को लेकर पार्टी नेतृत्व ने मांगा था स्पष्टीकरण

पार्टी की आपत्ति के बावजूद हरीश रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक यात्रा जारी रखी। इसके बाद उन्हें अपने कार्यक्रम को लेकर केंद्रीय नेतृत्व के सामने स्पष्टीकरण देने के लिए दिल्ली बुलाए जाने की चर्चा तेज हुई। रावत ने भी पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई थी।

पहले उनकी मुलाकात 7 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, लेकिन समय पर दिल्ली नहीं पहुंच पाने के कारण बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद 9 अक्टूबर को कुमारी सैलजा से मुलाकात का समय तय हुआ।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम घटनाक्रम

उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश में एकजुट होकर चुनाव लड़ने की रणनीति पर जोर दे रहा है। पार्टी चाहती है कि सभी वरिष्ठ नेता संगठन के तय कार्यक्रमों के तहत मिलकर जनता के बीच जाएं।

हरीश रावत और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की मुलाकात को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। अब इस बातचीत के बाद पार्टी के भीतर आगे की रणनीति और वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय को लेकर होने वाले फैसलों पर नजर रहेगी।

 

 

You missed