News : इंस्टाग्राम के जरिए एक कुर्ती खरीदने के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा के साथ हुई 6,450 रुपये की धोखाधड़ी की तहकीकात करते हुए नॉर्थ जिला पुलिस ने 30 करोड़ रुपये से अधिक के एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने ग्रेटर नोएडा और कानपुर में दबिश देकर कुल सात आरोपियों को दबोच लिया है।

पुलिस की जांच-पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी फर्जी फर्म तैयार करवाकर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर कमीशन के लालच में इन खातों को आगे साइबर जालसाजों तक पहुंचा दिया करते थे। इन बैंक खातों में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेन-देन (क्रेडिट ट्रांजेक्शन) का पता चला है। देश के विभिन्न राज्यों से इस गिरोह से जुड़े ऑनलाइन फ्रॉड की 27 शिकायतें दर्ज हैं।

News : आरोपियों के पास से बरामद सामान

पुलिस टीम ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 20 मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड, 39 पीओएस मशीनें, 33 एटीएम/डेबिट कार्ड, 28 चेकबुक, 15 क्यूआर स्कैनर, दो लैपटॉप और तमाम बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, मूल रूप से इलाहाबाद की रहने वाली और डीयू के रामजस कॉलेज की छात्रा फातिमा ने नॉर्थ साइबर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें इंस्टाग्राम पर ‘काव्य_कुर्ती_हब’ हैंडल से कुर्ती का एक विज्ञापन दिखा था। व्हाट्सएप पर 799 रुपये का आर्डर तय होने के बाद उन्होंने 400 रुपये अग्रिम (एडवांस) भुगतान किए।

इसके बाद, पार्सल की डिलीवरी और पैसे रिफंड करने के नाम पर उनसे अलग-अलग किस्तों के जरिए कुल 6,450 रुपये ऐंठ लिए गए। न तो पीड़िता को सामान मिला और न ही उनकी रकम वापस लौटाई गई। इस सिलसिले में बीते 4 सितंबर को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई थी।

News : 200 मोबाइल नंबरों की जांच से खुला राज

एसीपी विशेष धत्तरवाल के निर्देशन और एसएचओ रोहित गहलोत की देखरेख में तैयार की गई पुलिस टीम ने लगभग 200 मोबाइल नंबरों और उनके आईएमईआई (IMEI) नंबरों की तकनीकी जांच की। डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों के लेन-देन खंगालने के बाद पुलिस ग्रेटर नोएडा में स्थित फर्जी कंपनियों तक जा पहुंची।

इस कड़ी में 16 अक्टूबर को हुई छापेमारी के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 21 अक्टूबर को कानपुर से गिरोह के सातवें आरोपी उदित प्रताप सिंह भदौरिया को धर दबोचा गया।

News : हर महीने मिलते थे 25 हजार रुपये

पुलिस के अनुसार, ये शातिर आरोपी किजेनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एग्जीक्यूटिव एज और नेक्सकोर जैसी फर्जी कंपनियों के नाम पर सक्रिय थे। पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि बैंक खाते मुहैया कराने वाले लोगों को हर महीने 25 हजार रुपये तक सैलरी या कमीशन दिया जाता था।

एमबीए की पढ़ाई कर चुका आरोपी गौरव पांडे इन खातों को कमीशन पर आगे सप्लाई करने वाले इस सिंडिकेट का एक अहम मोहरा था। फिलहाल, पुलिस बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कागजातों की गहराई से छानबीन कर रही है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

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