News : ​उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके जीवनसाथी गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर इल्जाम लगाए गए हैं, जिससे राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस पूरे प्रकरण पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पहला आधिकारिक बयान सामने आया है।

सीएम धामी ने इस प्रकरण को अत्यधिक संवेदनशील करार देते हुए कहा कि सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच के उपरांत कानून जिसे गुनहगार साबित करेगा, वही दोषी होगा। इसके साथ ही, उन्होंने शादी के 22 वर्ष बीत जाने और आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मंत्री रेखा आर्या द्वारा पति पर लगाए गए इल्जामों की टाइमिंग पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कहा कि क्या 22 साल बाद मंत्री साहिबा को यह अहसास हुआ कि उनके पति पहले से शादीशुदा हैं?

News : ​मुख्यमंत्री ने इसे बताया जांच का दायरा

उत्तराखंड सरकार तथा भाजपा संगठन के आगामी आयोजनों के संबंध में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पार्टी के प्रांतीय कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसी दौरान जब उनसे कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू के आपसी विवाद और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो सीएम धामी ने जवाब दिया कि यह पूरा मामला जांच के दायरे में आता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर किन परिस्थितियों के तहत ये इल्जाम लगाए गए हैं।

​मुख्यमंत्री धामी ने इस संपूर्ण विवाद पर खुद कई सवाल खड़े किए। उन्होंने यह तर्क रखा कि जब रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू दो दशकों से अधिक समय यानी 22 साल तक एक साथ रहे, तो इतने लंबे अंतराल तक इस प्रकार की शिकायतें क्यों नहीं सामने आईं? उन्होंने यह भी पूछा कि मौजूदा वक्त में ही इन आरोपों के सार्वजनिक होने के पीछे क्या वजह है। सीएम ने स्पष्ट किया कि केवल किसी के इल्जाम लगा देने से कोई व्यक्ति अपराधी नहीं साबित हो जाता। सच्चाई का पता केवल गहन जांच के बाद ही चल पाएगा और कानून के नियमों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

News : ​वायरल ऑडियो को लेकर भी रखा पक्ष

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वायरल हो रही ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर किसी भी शख्स को दोषी करार न दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि मात्र किसी टेलीफोनिक बातचीत या चर्चा के दौरान किसी का नाम आ जाने से यह प्रमाणित नहीं हो जाता कि वह व्यक्ति भी उस अपराध में संलिप्त है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि बातचीत के दौरान कोई भी किसी का भी नाम ले सकता है, लेकिन इससे आरोपों की सत्यता सिद्ध नहीं होती। यही कारण है कि किसी भी ऑडियो क्लिप या बयान को अंतिम सत्य मानने के बजाय उसकी तकनीकी और तथ्यात्मक जांच आवश्यक है।

​सीएम धामी का यह भी कहना था कि इस प्रकरण के हर एक पहलू का बारीकी से विश्लेषण किया जाना चाहिए। बिना किसी ठोस जांच के किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नफे-नुकसान के नजरिए से किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यदि कोई इन परिस्थितियों का राजनीतिक लाभ उठाना चाहता है, तो इसके आधार पर किसी को मुजरिम नहीं कहा जा सकता। मुख्यमंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि कसूरवार वही व्यक्ति होगा, जिसने वास्तव में जुर्म किया हो और जिसे देश का कानून दोषी करार दे।

Also Read : मंत्री रेखा आर्या ने बालिका निकेतन में किया कन्या पूजन, बच्चों के साथ भोजन भी किया