कर्णप्रयाग। चमोली जिले के कर्णप्रयाग क्षेत्र के सड़क सुविधा से वंचित सकंड गांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने खुद श्रमदान शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने सड़क स्वीकृत न होने पर अपने स्तर से सड़क कटिंग का काम शुरू किया, जिसके बाद प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। डीएफओ और एसडीएम ने करीब नौ किलोमीटर पैदल चलकर सकंड गांव पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता की।
गांव पहुंचने के बाद अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच करीब दो घंटे तक बैठक हुई। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने सड़क की समस्या और लंबे समय से चली आ रही मांग को रखा। ग्रामीणों का कहना था कि गांव तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ आपात स्थिति में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़क की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए सड़क कटिंग शुरू करने का निर्णय लिया था।
बैठक के दौरान प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वन अधिनियम के तहत सड़क निर्माण की स्वीकृति दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक वन भूमि पर सड़क निर्माण की अनुमति नहीं मिलती, तब तक वहां निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों ने भी वन भूमि पर सड़क निर्माण रोकने पर सहमति जताई है।
ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तीन माह के भीतर सड़क निर्माण को मंजूरी नहीं मिली, तो वे दोबारा एकजुट होकर सड़क कटिंग का काम शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने सड़क को गांव की मूलभूत जरूरत बताते हुए जल्द से जल्द स्वीकृति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।
अधिकारियों के गांव तक पैदल पहुंचने और ग्रामीणों से सीधे संवाद करने के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है। अब ग्रामीणों की नजर वन अधिनियम के तहत मिलने वाली स्वीकृति पर है।
