देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी प्रदेश की 13 अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीटों के अलावा दो सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों को मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। अगर यह रणनीति लागू होती है तो भाजपा कुल 15 सीटों पर SC समाज के उम्मीदवारों को मौका दे सकती है।

दरअसल, प्रदेश में कुल 13 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इनमें से नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि चार सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं। भाजपा अब आरक्षित सीटों पर अपने प्रदर्शन को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य वर्ग की दो सीटों पर भी SC प्रत्याशी उतारने के पीछे पार्टी का उद्देश्य अनुसूचित जाति समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करना है। हाल में हल्द्वानी के शुद्धिकरण विवाद को लेकर हुई राजनीतिक गतिविधियों को भी भाजपा संगठन गंभीरता से ले रहा है। इसी के मद्देनजर सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन पर विचार किया जा रहा है।

2011 की जनगणना के मुताबिक, उत्तराखंड में अनुसूचित जाति की आबादी 18.76 प्रतिशत थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 13 आरक्षित सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी, लेकिन 2022 में पार्टी की जीत का आंकड़ा घटकर नौ रह गया। खासतौर पर हरिद्वार जिले की तीनों आरक्षित सीटों और ऊधमसिंह नगर की बाजपुर सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।

ऐसे में भाजपा आगामी चुनाव में आरक्षित सीटों के साथ सामान्य सीटों पर भी SC प्रत्याशियों को मौका देकर सामाजिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। हालांकि सामान्य सीटों पर उम्मीदवार उतारने का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व द्वारा चुनावी समीकरण और संभावित प्रत्याशियों के आधार पर किया जाएगा।

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