चंपावत। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की एक और तस्वीर चंपावत जिले से सामने आई है। बकोड़ा गांव में पैर में चोट लगने से परेशान बुजुर्ग को ग्रामीणों ने डंडे के सहारे बांधकर अस्पताल तक पहुंचाया। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को करीब आठ किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, बकोड़ा ग्राम पंचायत के मोस्टा निवासी बुजुर्ग दीवान सिंह कुछ दिन पहले खेत में हल चला रहे थे। इसी दौरान उनके पैर में लकड़ी चुभ गई। चोट लगने के बाद भी जब घाव ठीक नहीं हुआ और उनकी परेशानी बढ़ने लगी तो ग्रामीणों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

गांव तक सड़क नहीं होने के कारण चार युवाओं ने बुजुर्ग को डंडे से बांधकर कंधों के सहारे उठाया और करीब आठ किलोमीटर दूर सीम तक पहुंचाया। इस दूरी को तय करने में ग्रामीणों को लगभग तीन घंटे का समय लगा। इसके बाद वहां से टैक्सी की मदद से बुजुर्ग को टनकपुर उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि बकोड़ा गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने से बीमार और घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाना हमेशा बड़ी चुनौती बन जाता है। आपात स्थिति में मरीजों को इसी तरह पैदल रास्ते से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इससे समय पर उपचार मिलने में भी परेशानी होती है।

घटना ने एक बार फिर पहाड़ी गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाए, ताकि बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को इस तरह कंधों और डंडे के सहारे अस्पताल पहुंचाने की मजबूरी न रहे।