हरिद्वार। आगामी कांवड़ यात्रा को लेकर हरिद्वार के संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं से विशेष अपील करते हुए यात्रा के दौरान अनुशासन, मर्यादा और धार्मिक आस्था का पालन करने का आग्रह किया है। संतों ने कहा कि कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और तपस्या का पर्व है, इसलिए इसे पूरी श्रद्धा, संयम और शालीनता के साथ संपन्न किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी कांवड़ियों से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और यात्रा को शांतिपूर्ण बनाने में सहयोग देने की अपील की।

संतों ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अभद्रता, हुड़दंग, तेज रफ्तार वाहन चलाने, डीजे की तेज आवाज या कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं यात्रा की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं और श्रद्धालुओं की छवि भी प्रभावित करती हैं। कांवड़ यात्रा का मूल उद्देश्य भगवान शिव की भक्ति और आत्मिक साधना है, इसलिए हर श्रद्धालु को इसकी पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।

संत समाज ने श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि गंगा तटों, घाटों और यात्रा मार्गों पर कूड़ा-कचरा न फैलाएं तथा पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखें। साथ ही प्रशासन और पुलिस के निर्देशों का पालन करते हुए निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या दुर्घटना से बचा जा सके।

हरिद्वार प्रशासन भी कांवड़ यात्रा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यापक तैयारियां की गई हैं और विभिन्न विभागों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

संतों ने अंत में कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। यदि सभी श्रद्धालु अनुशासन और संयम का पालन करेंगे तो यह यात्रा सुरक्षित, सफल और आध्यात्मिक रूप से अधिक सार्थक बनेगी। उन्होंने सभी शिवभक्तों से “हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ शांतिपूर्ण और मर्यादित यात्रा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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