देहरादून। उत्तराखंड सरकार नशे की लत से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब ऐसे बच्चों के लिए राज्य में विशेष आवास (अकॉमोडेशन) चिन्हित किए जाएंगे, जहां उन्हें सुरक्षित वातावरण, देखभाल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य नशे की गिरफ्त से बाहर आए बच्चों को दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना है।

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस संबंध में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभाग ऐसे संस्थानों और भवनों को चिन्हित करेगा, जहां बचाव अभियान के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों को अस्थायी रूप से रखा जा सके। इन आवासों में बच्चों को भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, काउंसलिंग, शिक्षा और मनोवैज्ञानिक सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

अधिकारियों का कहना है कि केवल नशे से छुड़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों का सामाजिक और मानसिक पुनर्वास भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों की निगरानी में बच्चों की काउंसलिंग और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे दोबारा नशे की चपेट में न आएं।

सरकार का मानना है कि यह पहल नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को और मजबूत करेगी। साथ ही, बेसहारा और नशे से प्रभावित बच्चों को सुरक्षित माहौल देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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