श्रीनगर (पौड़ी)। अलकनंदा हाइड्रो पावर परियोजना (जीवीके) से प्रभावित लोगों की मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों ने अब भूख हड़ताल शुरू कर दी है। बुधवार को भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के संयोजक दौलत कुंवर और आंदोलनकारी सरस्वती देवी भूख हड़ताल पर बैठ गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

दरअसल, अलकनंदा हाइड्रो पावर परियोजना (जीवीके) कंपनी के मुख्य गेट पर महिलाएं मुआवजे के भुगतान और अन्य मांगों को लेकर धरना दे रही थीं। मंगलवार को पुलिस प्रदर्शन कर रही महिलाओं को वहां से हटाकर कोतवाली ले आई थी। इसके बाद आंदोलनकारियों ने कोतवाली में ही अपना धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया।

बुधवार को आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब दौलत कुंवर और सरस्वती देवी ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनके साथ सुनीता पांडे, गीता देवी, शंकरलाल, शकुंतला देवी और विमला सिलोड़ी समेत अन्य लोग भी धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित लोगों को अब तक उनका उचित मुआवजा नहीं मिला है। वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

वहीं, आंदोलनकारियों से बातचीत करने के लिए तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर वार्ता की, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन धरनास्थल से उठाकर मेडिकल जांच के लिए भेज दिया।

इस संबंध में कोतवाली प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि आंदोलनकारियों को एसडीएम कोर्ट में पेश किया जा रहा है। फिलहाल मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर विवाद जारी है। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा है कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।