देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े विवाद में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू और उनके भतीजे सतेंद्र राठौर के खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करा दिए गए हैं। दोनों आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। लंबे समय से फरार चल रहे गिरधारी लाल साहू की मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं।

मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने न्यायालय से दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल किए हैं। पुलिस की टीमें गिरधारी लाल साहू की तलाश में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में संभावित ठिकानों पर दबिश दे चुकी हैं, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। वहीं, सतेंद्र राठौर भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

दरअसल, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने 15 अक्तूबर को देहरादून की कैंट कोतवाली में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में धोखाधड़ी, मारपीट, आपराधिक षड्यंत्र और एससी-एसटी एक्ट समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। मंत्री ने पहली शादी छिपाकर विवाह करने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाने जैसे आरोप भी लगाए हैं। इसके अलावा एक कथित ऑडियो के आधार पर हत्या की साजिश रचने का आरोप भी लगाया गया है।

जांच के दौरान कंपनियों से जुड़े दस्तावेज भी एसआईटी की जांच के केंद्र में हैं। पुलिस को अब तक पांच कंपनियों से संबंधित कुछ दस्तावेजों की फोटोकॉपी मिली है, लेकिन मूल दस्तावेज बरामद नहीं हो पाए हैं। जांच में सामने आया कि रेखा आर्या को कंपनी के निदेशक पद से हटाए जाने के बाद उनके भतीजे सतेंद्र राठौर को निदेशक बनाया गया था। ऐसे में सतेंद्र की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

एसआईटी अब दोनों आरोपियों की तलाश के साथ ही मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाने में लगी है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और पूछताछ से मामले के कई अहम पहलुओं का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल दोनों की तलाश जारी है और जांच एजेंसी आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।