रुड़की। उत्तराखंड में नवरात्र और दीपावली के त्योहारों से पहले खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में विभाग की टीम ने छापेमारी कर नकली पनीर बनाने वाली एक इकाई का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई के दौरान करीब 10 कुंतल मिलावटी और अर्धनिर्मित सामग्री नष्ट कराई गई। साथ ही फैक्टरी को सील करने के साथ उसका खाद्य लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में मिलावटखोरी करने वालों में हड़कंप मच गया है।
पामोलिन तेल और मिल्क पाउडर से बनाया जा रहा था पनीर
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, 13 अक्टूबर की मध्यरात्रि से 14 अक्टूबर की सुबह तक सधीपुर गढ़ी गांव में स्थित पनीर निर्माण इकाई पर छापेमारी की गई। जांच के दौरान टीम को मौके पर बड़ी मात्रा में तैयार और अर्धनिर्मित पनीर के साथ उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिली।
छापेमारी में करीब तीन कुंतल तैयार पनीर, छह कुंतल अर्धनिर्मित पनीर और 90 किलोग्राम रिफाइंड पामोलिन ऑयल बरामद किया गया। इसके अलावा पामोलिन तेल के खाली और भरे टीन तथा स्किम्ड मिल्क पाउडर के खाली बोरे भी मिले।
विभाग के मुताबिक, इकाई में पामोलिन ऑयल और स्किम्ड मिल्क पाउडर का इस्तेमाल कर एनालॉग पनीर तैयार किया जा रहा था। उत्तराखंड में इस तरह के पनीर के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध है। टीम ने मौके पर गड्ढा खुदवाकर करीब 10 कुंतल सामग्री नष्ट करा दी।
फैक्टरी संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग ने फैक्टरी संचालक ताजिम, निवासी सधीपुर गढ़ी, के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। मौके से खुले पनीर और पामोलिन ऑयल के दो नमूने लेकर जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजे गए हैं। नमूनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
त्योहारों को देखते हुए बढ़ाई निगरानी
खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडे ने अधिकारियों को नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों की आपूर्ति रोकने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावट की आशंका को देखते हुए विभाग की ओर से निगरानी और छापेमारी की जा रही है। विभाग का उद्देश्य बाजार में सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
