देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड की राजनीति में सोमवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया। मशहूर बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता और देहरादून जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रामशरण नौटियाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 19 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी को उत्तराखंड की आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके भाजपा छोड़ने के बाद से ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। अब कांग्रेस में लौटने के साथ ही उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी को नई दिशा दी है।

भाजपा छोड़ने के पीछे बताया था सम्मान की कमी को कारण

भाजपा से इस्तीफा देने के बाद रामशरण नौटियाल ने पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता और सार्वजनिक मंचों पर अपमान किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी समर्पित कार्यकर्ता के लिए मान-सम्मान बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनके अनुसार, वह राजनीति में निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने और विकास कार्यों के लिए आए थे।

नौटियाल ने यह भी आरोप लगाया था कि पार्टी संगठन में उनकी बातों को उचित महत्व नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने संगठन की कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए भाजपा से अलग होने का फैसला लिया था।

2014 में भाजपा में हुए थे शामिल

रामशरण नौटियाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वह पार्टी संगठन में सक्रिय रहे और उत्तराखंड कांग्रेस में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें चकराता सीट से उम्मीदवार बनाया था, जहां उन्हें कांग्रेस के प्रीतम सिंह के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा था।

अब करीब 12 साल बाद कांग्रेस में उनकी वापसी से देहरादून और चकराता क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल होने की संभावना है। कांग्रेस नेताओं ने उनके पार्टी में शामिल होने का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि उनके अनुभव से संगठन को मजबूती मिलेगी। आगामी चुनावों से पहले इस राजनीतिक बदलाव पर प्रदेश की सियासत में नजर बनी रहेगी।