देहरादून। उत्तराखंड में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और प्रदेश में निवेश को लेकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। उद्योग निदेशालय की शिकायत पर देहरादून के राजपुर थाने में आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही सामग्री से निवेशकों के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे प्रदेश की निवेश छवि प्रभावित होने की आशंका है।
मामले में उद्योग निदेशालय के अपर निदेशक मृत्युंजय सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजी थी। शिकायत के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश को प्रोत्साहन देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से दिसंबर 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया था। इसके बाद से निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
आरोप है कि एक्स (पूर्व में ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कामरान नामक व्यक्ति समेत कुछ अन्य लोगों की ओर से समिट और निवेश से संबंधित कथित भ्रामक एवं तथ्यहीन सामग्री साझा की जा रही थी। उद्योग निदेशालय ने इस मामले में साइबर और तकनीकी जांच कराने के साथ संबंधित सोशल मीडिया खातों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों और ऑनलाइन पोस्ट की जांच कर रही है।
1.01 लाख करोड़ रुपये के निवेश के धरातल पर उतरने का दावा
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश में निवेश को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। उद्योग सचिव विनय शंकर पांडे ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में कुल 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर समझौता ज्ञापन किए गए थे। इनमें से अब तक 1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को धरातल पर उतारने का दावा किया गया है।
उद्योग सचिव के अनुसार, निवेश से संबंधित आंकड़े पारदर्शी हैं और उद्योग विभाग के यूके स्पाइस तथा सिंगल विंडो सिस्टम जैसे सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इन पोर्टल पर परियोजनाओं से संबंधित जानकारी देखी जा सकती है। उन्होंने निवेश के आंकड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों को भ्रामक बताया है।
पुलिस कर रही मामले की जांच
शिकायत में आशंका जताई गई है कि इस तरह की पोस्ट से प्रदेश में निवेश करने वाले संभावित उद्यमियों के बीच गलत संदेश जा सकता है। पुलिस अब संबंधित खातों और पोस्ट की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
