देहरादून। उत्तराखंड को नया राज्यपाल मिल गया है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार, 19 अक्टूबर को देहरादून स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल पद की शपथ ली। उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। शपथ ग्रहण के साथ ही डॉ. बिसेन ने उत्तराखंड के नए संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल लिया।

समारोह से पहले उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्ति अधिपत्र पढ़कर सुनाया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. बिसेन को शपथ दिलाई। इससे पहले नवनियुक्त राज्यपाल के देहरादून पहुंचने पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया गया। पुलिस की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने परेड का निरीक्षण भी किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ और देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। लोक भवन पहुंचने पर भी राज्यपाल का वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने स्वागत किया।

मध्य प्रदेश की राजनीति में रहा है लंबा अनुभव

डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। पेशे से चिकित्सक और कृषक रहे डॉ. बिसेन को मध्य प्रदेश की राजनीति का लंबा अनुभव है। वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं और अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

डॉ. बिसेन वर्ष 1990 से 2008 के बीच चार बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी सेवाएं दीं। उनके पास वन, परिवहन एवं खनिज तथा स्कूल शिक्षा एवं जेल विभागों की जिम्मेदारी रही। इसके बाद मई 2019 में वह 17वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

राष्ट्रपति ने 12 अक्टूबर को की थी नियुक्ति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया था। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लिया है। उनकी नियुक्ति के साथ प्रदेश को नया संवैधानिक प्रमुख मिला है।

डॉ. बिसेन का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव उत्तराखंड में उनकी नई जिम्मेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यपाल के रूप में अब उनकी भूमिका प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप दायित्वों के निर्वहन की होगी।