देहरादून। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उत्तराखंड में सियासी हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को देहरादून में विपक्षी दलों ने ‘वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च’ निकालकर मतदाता अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराया। मार्च में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन से जुड़े दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए सरकार और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
विपक्षी दलों की ओर से पहले ही दो से आठ अक्तूबर तक लोकतंत्र बचाओ-वोट बचाओ अभियान चलाने की घोषणा की गई थी। इसी अभियान के अंतिम दिन देहरादून में मार्च आयोजित किया गया। अभियान के तहत जिला, शहर और ब्लॉक स्तर पर भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कांग्रेस और गठबंधन के नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाना और उनके मताधिकार की रक्षा करना जरूरी है।
मार्च के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की मांग उठाई। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया में कई वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने चुनाव आयोग और सरकार से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संचालित करने तथा आपत्तियों का निष्पक्ष निस्तारण करने की मांग की।
विपक्ष ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। नेताओं ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रिय रहने और मतदाताओं को अपने नाम की जांच करने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया।
वहीं, देश के अन्य हिस्सों में भी विपक्षी दल मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है, जबकि निर्वाचन आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।
देहरादून में आयोजित मार्च के जरिए विपक्ष ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा आने वाले दिनों में भी प्रदेश की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बना रहेगा।
