पिथौरागढ़। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ अब यातायात व्यवस्था भी चुनौती बनने लगी है। आदि कैलाश मार्ग पर पहली बार जाम की स्थिति सामने आने के बाद यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना 700 से अधिक यात्री और 200 से ज्यादा वाहनों के पहुंचने से सड़क पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
जाम की समस्या को देखते हुए पिथौरागढ़ पुलिस और प्रशासन ने इसके स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू कर दिया है। पुलिस की टीम ने आदि कैलाश क्षेत्र का निरीक्षण कर जाम के कारणों का जायजा लिया। सामने आया कि फिलहाल सड़क के अलावा वाहनों की पार्किंग के लिए कोई पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वाहनों को सड़क किनारे खड़ा किए जाने से मार्ग संकरा हो जाता है और यातायात प्रभावित होता है। समस्या के समाधान के लिए व्यास घाटी के कुटी और नाभी गांव में पार्किंग विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
हालांकि पार्किंग निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कुटी और नाभी क्षेत्र में जमीन पर स्थानीय ग्रामीणों का कब्जा है। पार्किंग निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता होने के कारण ग्रामीणों से बातचीत की जा रही है। प्रारंभिक वार्ता में ग्रामीणों ने जमीन देने से इनकार किया है। अब पुलिस और प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के साथ दोबारा वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
इस बीच हालिया बर्फबारी ने भी यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। क्षेत्र में तीन से चार फीट तक बर्फ जमा हुई थी। बीआरओ ने जेसीबी की मदद से सड़क से बर्फ हटाई, लेकिन सड़क के दोनों किनारों पर बर्फ जमा रहने से मार्ग की प्रभावी चौड़ाई कम हो गई। इससे वाहनों को एक-दूसरे को पास देने में परेशानी हुई और जाम की स्थिति बनी।
आदि कैलाश की बढ़ती लोकप्रियता के साथ यात्रियों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2023 में 10,079 यात्री पहुंचे थे, जबकि 2024 में यह संख्या 29,423 और 2025 में 31,558 रही। वर्ष 2026 में अब तक 61,950 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं। ऐसे में आने वाले समय में पार्किंग और यातायात प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था नहीं की गई तो जाम की समस्या और गंभीर हो सकती है।
