देहरादून। उत्तराखंड में शहरों और कस्बों के सुनियोजित विकास की दिशा में सरकार ने बड़ी पहल शुरू की है। प्रदेश के 98 छोटे-बड़े शहरों और कस्बों के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। इन योजनाओं के जरिए शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ ही भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकास का खाका तैयार किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश के सात प्रमुख शहरों को अमृत-1 योजना के तहत शामिल किया गया है। इनमें देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और नैनीताल समेत अन्य शहर शामिल हैं। वहीं, बाकी शहरों और कस्बों के लिए भी उनकी स्थानीय जरूरतों और विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

मास्टर प्लान के तहत शहरों में सड़क, यातायात, आवास, पेयजल, सीवरेज, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही बढ़ती आबादी और शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए भविष्य के विस्तार के लिए भी जगह निर्धारित की जाएगी। इससे अनियोजित निर्माण और बेतरतीब विकास को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अमृत योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। केंद्र सरकार के अनुसार, अमृत योजना के तहत जलापूर्ति और सीवरेज जैसी शहरी आधारभूत परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जबकि अमृत 2.0 के तहत शहरों को जल-सुरक्षित बनाने और जलापूर्ति व सीवरेज सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सुनियोजित शहरी विकास की जरूरत लगातार बढ़ रही है। पर्यटन और आबादी के विस्तार के साथ कई शहरों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में मास्टर प्लान के जरिए विकास कार्यों को एक तय योजना के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य शहरों के विकास के साथ पर्यावरण और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना भी है।