देहरादून। उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिले के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। चार अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द किए जाने के बाद अब 370 से अधिक संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है। मामले का खुलासा करने वाले एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा ने संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को सौंपते हुए विस्तृत जांच और कार्रवाई की मांग की है।

दरअसल, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आई थीं। देहरादून जिला प्रशासन की जांच में चार अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इसके बाद प्रमाणपत्र निरस्त करने के साथ ही संबंधित चारों एमबीबीएस दाखिले भी रद्द कर दिए गए।

जांच के दौरान प्रमाणपत्रों में दर्ज पते और दाखिले से जुड़े दस्तावेजों में अंतर पाया गया। इसके अलावा दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में भी कई खामियां सामने आईं। फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने के आरोप में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ देहरादून के दो थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए गए और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका है या नहीं।

एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा का दावा है कि ऐसे 370 से अधिक संदिग्ध अभ्यर्थी हो सकते हैं, जिन्होंने एमबीबीएस में दाखिले के लिए कथित तौर पर गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को सौंपी सूची में शामिल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित से जुड़े प्रमाणपत्रों की जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि सूची में कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने स्कूली शिक्षा और NEET की परीक्षा दूसरे राज्यों से की, लेकिन दाखिले के लिए उत्तराखंड के स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र हासिल किए।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पहले सामने आए मामलों को लेकर जिलाधिकारी देहरादून को जांच के निर्देश दिए गए थे। फिलहाल जांच जारी है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 370 से अधिक संदिग्ध मामलों में कितने अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में वास्तव में अनियमितता पाई जाती है।