देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को शिक्षा विभाग और राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता दिलाने की प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है। एक माह से अधिक समय बीतने के बाद राज्य के 452 मदरसों में से अब तक केवल सात मदरसों को ही मान्यता मिल पाई है। यह संख्या कुल मदरसों का करीब एक फीसदी है। मामले को लेकर देहरादून के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जांच रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंप दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मदरसों ने मान्यता लेने से साफ इनकार किया है, जबकि कुछ संस्थानों ने जांच टीम को आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। मदरसा बोर्ड से पहले मान्यता प्राप्त 41 मदरसों में से भी अधिकांश अभी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं। कई मदरसों की ओर से मान्यता के लिए दस्तावेज तैयार करने की बात कही गई है।
सरकार का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत विज्ञान और गणित जैसे विषयों को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने के साथ संस्थानों में पारदर्शिता और समान प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की योजना है।
वहीं, ऊधमसिंह नगर में मान्यता के लिए आवेदन करने वाले 11 मदरसों के आवेदन मानक पूरे नहीं होने के कारण खारिज कर दिए गए। हरिद्वार में 18 में से सात मदरसों को मान्यता मिली है, जबकि देहरादून और नैनीताल में अभी बैठक नहीं हुई है।
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। यह अवधि 30 सितंबर को पूरी होगी। इसके बाद मान्यता नहीं लेने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
