रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा के दौरान खुद को न्यायाधीश बताकर प्रशासन और पुलिस पर रौब झाड़ने वाले आरोपी को रुद्रप्रयाग की अदालत ने दोषी करार देते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने कहा कि सरकारी पद का झूठा परिचय देकर लोगों को गुमराह करना और सरकारी व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास गंभीर अपराध है।

मामले की सुनवाई सिविल जज (सीडी)/न्यायिक मजिस्ट्रेट रुद्रप्रयाग की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान आरोपी ने स्वयं को न्यायिक अधिकारी (जज) बताकर प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर प्रभाव डालने की कोशिश की थी। जांच के दौरान उसके दावे झूठे पाए गए, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की हरकतें न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी कमजोर करती हैं।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपी ने यात्रा के दौरान विशेष सुविधाएं प्राप्त करने और अधिकारियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से खुद को जज बताया था। हालांकि, पुलिस की जांच में उसकी वास्तविक पहचान सामने आने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया और नियमित सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया।

चारधाम यात्रा के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन यात्रा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखता है। अदालत के इस फैसले को सरकारी पद का दुरुपयोग करने या झूठी पहचान बताकर प्रशासन को गुमराह करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी या न्यायिक अधिकारी बताकर अनुचित लाभ लेने का प्रयास करे, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।

 

 

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