देहरादून। ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन सड़क परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का आंदोलन तेज हो गया है। हरेला पर्व के अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने ‘काला हरेला’ मनाकर सरकार से पेड़ों की कटाई तत्काल रोकने और परियोजना के लिए वैकल्पिक समाधान तलाशने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए शिवालिक वन क्षेत्र में हजारों पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि यह क्षेत्र हाथी कॉरिडोर और जैव विविधता की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। बड़ी संख्या में लोग काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और पेड़ों को बचाने की अपील की।
आंदोलनकारियों ने सरकार से विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की मांग की। उनका कहना है कि सड़क निर्माण आवश्यक है, लेकिन इसके लिए ऐसे विकल्प अपनाए जाने चाहिए जिनसे कम से कम पेड़ों की कटाई हो। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पेड़ों के संरक्षण के समर्थन में नारे लगाए और पर्यावरण बचाने का संकल्प भी लिया।
दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि सड़क परियोजना क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और चारधाम यात्रा समेत स्थानीय लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। परियोजना से पहले आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां ली गई हैं और नियमानुसार कार्य किया जा रहा है। हालांकि, विरोध के चलते पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है।
गौरतलब है कि ऋषिकेश-भानियावाला मार्ग पर पेड़ों की कटाई को लेकर पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। मामला न्यायिक प्रक्रिया तक भी पहुंच चुका है और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनचर्चा तेज हो गई है। हरेला जैसे पर्यावरण पर्व पर हुए इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस को केंद्र में ला दिया है।
