देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ आक्रामक रणनीति बनाने का संकेत दिया है। पार्टी ने साफ किया है कि वह भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों और मंदिरों में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से उठाएगी। कांग्रेस का आरोप है कि इन घटनाओं ने राज्य में सरकार की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राज्य में युवाओं का भविष्य पेपर लीक घटनाओं से प्रभावित हुआ है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को परेशानी झेलनी पड़ी। पार्टी का आरोप है कि सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने में विफल रही है। कांग्रेस का दावा है कि आगामी चुनाव में युवाओं के रोजगार और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा प्रमुख रहेगा।

इसके अलावा, कांग्रेस बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से जुड़े चढ़ावा प्रकरण को भी राजनीतिक मुद्दा बनाएगी। पार्टी का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। हाल के दिनों में इस मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सरकार ने जांच के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जबकि पुलिस भी मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

प्रदेश कांग्रेस का मानना है कि इन मुद्दों के जरिए सरकार की कथित विफलताओं को जनता के सामने रखा जाएगा। पार्टी संगठन स्तर पर भी चुनावी तैयारियों को तेज करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनसंपर्क अभियान चलाने की योजना बना रही है। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन और संवाद कार्यक्रम आयोजित करेगी।

वहीं, भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और किसी भी अनियमितता पर कार्रवाई की जा रही है। पार्टी का दावा है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए इन मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में पेपर लीक और मंदिर चढ़ावा प्रकरण प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।