केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की राशि के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद में जांच रिपोर्ट के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी जांच में पाया कि वीआईपी मेहमानों के खान-पान और अन्य व्यवस्थाओं पर मंदिर की दानराशि खर्च किए जाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, यह विवाद सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से सामने आए दस्तावेजों के बाद शुरू हुआ था। आरोप लगाए गए थे कि केदारनाथ धाम में कुछ वीआईपी मेहमानों और जनप्रतिनिधियों की आवभगत पर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दानराशि का उपयोग किया गया। मामले के सार्वजनिक होने के बाद BKTC ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन कर पूरे प्रकरण की जांच कराई थी।

जांच रिपोर्ट में संबंधित अभिलेखों और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा के बाद कई अनियमितताओं की पुष्टि होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मंदिर समिति के वित्तीय प्रबंधन में निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। हालांकि, जांच समिति ने अंतिम जिम्मेदारी तय करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय शासन और मंदिर समिति के उच्च स्तर पर छोड़ दिया है।

मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार और मंदिर समिति पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी दानराशि का उपयोग केवल मंदिर व्यवस्था और जनहित के कार्यों में होना चाहिए, न कि वीआईपी मेहमानों की सुविधाओं पर। वहीं, जिन जनप्रतिनिधियों के नाम सामने आए थे, उन्होंने पहले ही इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने दौरे का खर्च स्वयं वहन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

अब जांच रिपोर्ट आने के बाद BKTC और राज्य सरकार पर आगे की कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। मंदिर समिति का कहना है कि रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम ने चारधाम यात्रा के दौरान मंदिर समितियों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।