देहरादून। उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। पिछले दो दिनों में प्रदेश में बिजली की खपत तेजी से बढ़ते हुए करीब 6.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर माना जा रहा है। बढ़ती मांग के कारण प्रदेश के कई बिजलीघरों और ट्रांसमिशन लाइनों पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है। हालांकि, ऊर्जा निगम (यूपीसीएल) ने स्पष्ट किया है कि राज्य में कहीं भी घोषित बिजली कटौती नहीं की जा रही है और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने का प्रयास जारी है।

ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत में बिजली की मांग लगभग 4.6 करोड़ यूनिट थी, जो 26 जून तक बढ़कर करीब 6.5 करोड़ यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। मांग को पूरा करने के लिए राज्य पूल, केंद्रीय पूल और अन्य स्रोतों से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद कई स्थानों पर ओवरलोडिंग के कारण ट्रिपिंग की घटनाएं सामने आई हैं।

ऋषिकेश, ज्वालापुर, पदार्था और श्रीनगर समेत कुछ क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों और 132 केवी बिजलीघरों पर अधिक भार पड़ने से अस्थायी व्यवधान देखने को मिला। तकनीकी कारणों और ट्रिपिंग की वजह से कुछ इलाकों में सीमित समय के लिए बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, लेकिन अधिकारियों ने इसे जल्द बहाल कर दिया।

वहीं, उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) का वर्तमान उत्पादन करीब 1.6 करोड़ यूनिट प्रतिदिन है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून सक्रिय होने और जलस्तर बढ़ने के बाद जलविद्युत उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। फिलहाल गर्मी और बढ़ती खपत के बीच प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना ऊर्जा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।