नैनीताल। नैनीताल नगर में बाहरी जिलों से आने वाले दोपहिया वाहनों पर 100 रुपये प्रवेश शुल्क लगाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। नगर पालिका के कई सभासदों ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इसे आम लोगों और पर्यटकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। विरोध के बाद नगर पालिका प्रशासन पर इस फैसले पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ गया है।

सभासदों का कहना है कि नैनीताल पर्यटन आधारित शहर है और यहां बड़ी संख्या में पर्यटक दोपहिया वाहनों से पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश शुल्क लगाने से पर्यटकों पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा और इसका सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और पर्यटन से जुड़े लोगों से इस संबंध में कोई व्यापक चर्चा नहीं की गई, जबकि ऐसा निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की राय ली जानी चाहिए।

विरोध कर रहे जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यदि शहर में ट्रैफिक नियंत्रण और पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाना उद्देश्य है, तो इसके लिए वैकल्पिक उपाय अपनाए जाने चाहिए। केवल शुल्क बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनका सुझाव है कि पार्किंग सुविधाओं का विस्तार किया जाए, यातायात प्रबंधन को मजबूत किया जाए और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

दूसरी ओर, नगर पालिका का कहना है कि प्रस्तावित शुल्क का उद्देश्य शहर में बढ़ते यातायात के दबाव को नियंत्रित करना और पार्किंग व अन्य नागरिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना था। हालांकि निर्णय के खिलाफ बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल इस व्यवस्था को स्थगित कर दिया है। अब इस विषय पर सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

स्थानीय लोगों और व्यापारिक संगठनों ने भी सभासदों की मांग का समर्थन किया है। उनका मानना है कि पर्यटन नैनीताल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए जिससे पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो। फिलहाल शुल्क व्यवस्था पर रोक लगने से पर्यटकों और दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिली है। नगर पालिका ने संकेत दिए हैं कि सभी पक्षों की राय लेने के बाद ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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