देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लोकभवन के बाहर प्रदर्शन करने के मामले में कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कैंट थाना पुलिस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत समेत 40 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें 30 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 10 से 15 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने यह कार्रवाई बृहस्पतिवार को हुए प्रदर्शन के बाद की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच और संबंधित मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर लोकभवन की ओर कूच किया था। प्रदर्शनकारी भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का विरोध कर रहे थे। कांग्रेस की मांग थी कि मामले की जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए।
बैरिकेडिंग पार कर लोकभवन पहुंचने की कोशिश
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्धारित निर्देशों का उल्लंघन किया। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग पार की और लोकभवन के मुख्य गेट को खोलने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की होने की बात भी सामने आई है।
घटनाक्रम के बाद कैंट थाना पुलिस ने लोक सेवक के आदेश की अवहेलना और लोक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालने से संबंधित आरोपों में मुकदमा दर्ज किया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी के संबंध में सामने आए सवालों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जवाब मिलना चाहिए। पार्टी ने मामले की समयबद्ध जांच कराने और सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पार्टी नेताओं ने मामले में न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कांग्रेस इस मुद्दे पर आगे भी आंदोलन जारी रखने की तैयारी में है।
लोकभवन के बाहर हुए इस प्रदर्शन के बाद अब मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। पुलिस की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कांग्रेस की ओर से अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवालों के कारण यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
