अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बावजूद अल्मोड़ा जिले के पनुवानौला बाजार में पार्किंग निर्माण का काम तीन साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। वर्ष 2023 में की गई इस घोषणा के तहत मुख्य बाजार के समीप वन चौकी तक बहुस्तरीय पार्किंग बनाने की योजना थी। अब वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित फाइल गायब होने का मामला सामने आने के बाद योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे हैं। पेयजल निर्माण निगम का कहना है कि संबंधित पत्रावली करीब तीन माह पहले गायब हो गई थी, जिसे दोबारा तैयार कर वन विभाग को भेजा जाएगा।
पार्किंग निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), राजस्व विभाग, जिला प्रशासन, जिला विकास प्राधिकरण, वन विभाग और पेयजल निर्माण निगम की ओर से विभिन्न स्तरों पर रिपोर्ट तैयार की गई थीं। इसके बावजूद भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। मामले में अब विभागों के अलग-अलग दावों के चलते जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
वन विभाग को नहीं मिले दस्तावेज
पेयजल निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक हरीश प्रकाश के अनुसार, भूमि हस्तांतरण, पार्किंग और शौचालय निर्माण से संबंधित फाइल लगभग तीन माह पहले गायब हो गई थी। उन्होंने कहा कि पत्रावली दोबारा तैयार करके एक माह के भीतर वन विभाग को भेज दी जाएगी।
वहीं, प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप धौलाखंडी का कहना है कि पनुवानौला में पार्किंग और शौचालय निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज उनके कार्यालय को प्राप्त नहीं हुए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पार्किंग नहीं होने से बाजार में जाम
पनुवानौला बाजार अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 309बी पर स्थित है। यहां पार्किंग की सुविधा नहीं होने के कारण वाहन चालकों को सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी करनी पड़ती हैं। इससे बाजार में जाम की स्थिति बनती है और स्थानीय व्यापारियों तथा यात्रियों को परेशानी होती है। जागेश्वर धाम, वृद्ध जागेश्वर और आदि कैलाश जाने वाले पर्यटकों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष गोपाल सिंह मेहता ने दावा किया कि वन भूमि हस्तांतरण संबंधी प्रमाणपत्र जारी कर प्रभागीय वनाधिकारी को भेजा गया था। उन्होंने पेयजल निर्माण निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पर्यटन व्यवसायी देवेंद्र बिनवाल ने भी पार्किंग निर्माण में हो रही देरी को स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बताया।
अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन साल बाद भी जरूरी प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो पाई और फाइल गायब होने के मामले में जिम्मेदारी किसकी है। फिलहाल, स्थानीय लोगों को पार्किंग सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
