हरिद्वार। पितृ अमावस्या के अवसर पर शनिवार को धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर शहर की यातायात व्यवस्था पर भी देखने को मिला। दिल्ली-देहरादून हाईवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से लंबा जाम लग गया। इसके चलते स्थानीय लोगों के साथ ही हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।

गंगा घाटों और नारायणी शिला में उमड़ी भीड़

सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते सुबह से ही हरिद्वार के प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी।

हरकी पैड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों और नारायणी शिला मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने गंगा में स्नान कर अपने पितरों का स्मरण किया और विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। शनिवार को अमावस्या और वीकेंड का संयोग होने से श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी देखने को मिली।

हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण दिल्ली-देहरादून हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। शहर में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों और चौराहों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति बनी रही। बड़ी संख्या में निजी कारों और अन्य वाहनों के हरिद्वार पहुंचने से यातायात की रफ्तार धीमी पड़ गई।

जाम के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से अधिक समय लगा। धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर भीड़ बढ़ने से शहर के अंदर आवागमन प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों को भी अपने दैनिक कार्यों के लिए आने-जाने में परेशानी झेलनी पड़ी।

पुलिस-प्रशासन के सामने यातायात संभालने की चुनौती

पितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के लिए यातायात व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण रहा। प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों के आसपास भीड़ नियंत्रित करने के साथ वाहनों की आवाजाही सुचारु रखने की चुनौती बनी रही। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता की आवश्यकता रही।

पितृ अमावस्या के चलते हरिद्वार में धार्मिक गतिविधियां तेज रहीं। हालांकि, श्रद्धालुओं की भारी आमद ने एक बार फिर पर्वों के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पर बढ़ने वाले दबाव को उजागर किया।

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