नैनीताल। उत्तराखंड में बिजली चोरी और अनधिकृत इस्तेमाल के कारण उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रदेश के 11 विद्युत डिवीजनों में बिजली चोरी के चलते करीब 8 करोड़ यूनिट बिजली का नुकसान सामने आया है। इससे निगम की वितरण व्यवस्था और राजस्व पर भी असर पड़ रहा है। मामले को लेकर बिजली विभाग की ओर से निगरानी और कार्रवाई तेज किए जाने की बात कही जा रही है।
बिजली चोरी के मामलों में उपभोक्ताओं की ओर से मीटर में छेड़छाड़, सीधे लाइन से बिजली लेना और स्वीकृत भार से अधिक बिजली का इस्तेमाल जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों की जांच के लिए UPCL की विजिलेंस टीम समय-समय पर अभियान चलाती है। निगम की ओर से बिजली चोरी रोकने के लिए जांच, निरीक्षण और कार्रवाई की व्यवस्था भी की गई है।
हालिया आंकड़ों में 11 डिवीजनों में बिजली चोरी से बड़ी मात्रा में बिजली के नुकसान का मामला सामने आया है। इससे निगम को आर्थिक नुकसान होने के साथ ही बिजली वितरण के दौरान होने वाले कुल नुकसान को नियंत्रित करने की चुनौती भी बढ़ गई है। UPCL प्रदेश में बिजली वितरण का जिम्मेदार सरकारी उपक्रम है और वर्तमान में करीब 29 लाख उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध करा रहा है।
इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी उत्तराखंड में बिजली वितरण से जुड़े नुकसान को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के कुछ डिवीजनों में वितरण हानि अपेक्षाकृत अधिक पाई गई। वर्ष 2021-22 से 2023-24 के दौरान रुड़की विद्युत वितरण सर्किल में ही 964.465 मिलियन यूनिट की वितरण हानि दर्ज की गई, जिसकी कीमत करीब 488.50 करोड़ रुपये आंकी गई।
CAG ने बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत भी बताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित अवधि में UPCL के फील्ड अधिकारियों ने निर्धारित लक्ष्य की तुलना में कम मीटरों की जांच की थी। ऐसे में बिजली चोरी रोकना निगम के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
अब 11 डिवीजनों में सामने आए करीब 8 करोड़ यूनिट के नुकसान के बाद विभागीय स्तर पर बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई और जांच को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। निगम का लक्ष्य चोरी पर अंकुश लगाने के साथ बिजली वितरण में होने वाले नुकसान को कम करना और राजस्व की स्थिति को बेहतर करना है।
