देहरादून। उत्तराखंड में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के जरिए एमबीबीएस में दाखिले के मामले में प्रशासन ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। प्रमाणपत्रों के सत्यापन में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद देहरादून तहसील सदर के दो लेखपालों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित किए गए लेखपालों में जगदीश राठौर और महिला लेखपाल डिंपल शामिल हैं।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई है। जिला प्रशासन की ओर से गठित संयुक्त जांच समिति प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। जांच में सामने आया कि संबंधित आवेदनों में लगाए गए दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी इन लेखपालों पर थी। प्रशासन के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही के कारण प्रमाणपत्र निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी हो गए।

फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए एमबीबीएस में दाखिले का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू की है। मामले में अब तक छात्रा के पिता और मेरठ निवासी कथित दलाल रूपेश पंडित की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। प्रकरण की जांच एसआईटी कर रही है, जबकि जिला प्रशासन की ओर से भी विभागीय स्तर पर जांच जारी है।

वहीं, इस कार्रवाई के विरोध में उत्तराखंड लेखपाल संघ ने भी आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि मैदानी क्षेत्रों में लेखपालों पर प्रमाणपत्रों के सत्यापन का भारी दबाव रहता है और उन्हें आवेदकों की ओर से अपलोड किए गए दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करनी होती है। संघ ने कहा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। संघ ने 25 सितंबर से प्रमाणपत्र संबंधी कार्यों के बहिष्कार का ऐलान किया है।

प्रशासन ने संकेत दिया है कि जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में सरकार ने पहले ही फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए हुए एमबीबीएस दाखिलों की जांच के निर्देश दिए हैं।