उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड के पाटा गांव में शिक्षा व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। वर्ष 1960 में स्थापित राजकीय प्राथमिक विद्यालय करीब 66 वर्षों बाद पूर्ण रूप से बंद हो गया है। छात्र संख्या शून्य होने के कारण विद्यालय में ताला लग गया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में घटती शैक्षिक स्थिति और पलायन की गंभीर समस्या को उजागर करता है।

जानकारी के अनुसार, पाटा गांव में एक समय तीन सरकारी विद्यालय संचालित थे, जिनमें प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल और हाईस्कूल शामिल थे। लेकिन बीते वर्षों में लगातार घटती छात्र संख्या के चलते वर्ष 2023-24 में जूनियर हाईस्कूल पहले ही बंद हो चुका है। अब गांव में केवल राजकीय हाईस्कूल ही बचा है, जहां वर्तमान में मात्र दो छात्र अध्ययनरत हैं, जिससे उसके भविष्य पर भी संकट मंडरा रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले एक दशक में बेहतर शिक्षा की तलाश में ग्रामीणों का शहरी क्षेत्रों की ओर तेजी से पलायन हुआ है। इसका सीधा असर गांव के स्कूलों पर पड़ा है। जहां कभी विद्यालय में दर्जनों छात्र पढ़ते थे, वहीं अब स्थिति यह है कि नए प्रवेश तक नहीं हो पा रहे हैं।

सेवानिवृत्त शिक्षक प्रद्युमन नौटियाल और देवेंद्र चौहान ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस नीतियां बनानी चाहिए। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी हर्षा रावत ने बताया कि नए प्रवेश न होने के कारण विद्यालय को बंद करने का प्रस्ताव मिला था, जिसे अब प्रभावी मान लिया गया है।

सरकार जहां एक ओर प्रवेशोत्सव के माध्यम से छात्र संख्या बढ़ाने के प्रयास कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।