देहरादून। उत्तराखंड में कर चोरी और कर नियमों के उल्लंघन के खिलाफ राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की आठ टीमों ने देहरादून में दो माइक्रो ब्रेवरीज और करीब आठ बार, क्लब व रेस्टोरेंट प्रतिष्ठानों पर एक साथ औचक छापेमारी की। जांच के दौरान वैट और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े कई अनियमित मामले सामने आए। दोनों माइक्रो ब्रेवरीज में करीब 2.5 करोड़ रुपये का ऐसा कारोबार सामने आया है, जिस पर कर देयता बनती है।

बिना पंजीकरण चल रही थीं माइक्रो ब्रेवरीज

राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त (कार्यपालक) अनुराग मिश्रा और उपायुक्त अजय बिरथरे के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। जांच में पता चला कि दोनों माइक्रो ब्रेवरीज वैट अधिनियम के तहत अनिवार्य पंजीकरण के बिना संचालित की जा रही थीं। इन इकाइयों में उत्पादित बीयर की बिक्री पर वैट जमा नहीं किया जा रहा था।

उपायुक्त अजय बिरथरे के अनुसार, शुरुआती जांच में दोनों इकाइयों का लगभग 2.5 करोड़ रुपये का ऐसा टर्नओवर सामने आया है, जिस पर कर बनता है। संबंधित संचालकों ने नियमों की जानकारी नहीं होने का हवाला देते हुए अपनी गलती स्वीकार की और बकाया कर के साथ ब्याज जमा करने पर सहमति जताई है।

बार और क्लबों में भी मिली अनियमितताएं

कार्रवाई के दौरान कई बार और क्लबों में भी कर संबंधी गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में कुछ प्रतिष्ठानों के संचालकों ने शराब की बिक्री के लिए आवश्यक वैट पंजीकरण नहीं कराने की बात स्वीकार की। वहीं, कुछ बार संचालकों ने रेस्टोरेंट सेवाओं से संबंधित जीएसटी रिटर्न भी दाखिल नहीं किए थे।

विभाग की कार्रवाई के दौरान संबंधित संचालकों ने अपनी गलतियां स्वीकार करते हुए मौके पर ही करीब 11.5 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके अलावा, एक नामी क्लब ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत दावा स्वीकार किया। क्लब ने अपनी अगली मासिक विवरणी में 33 लाख रुपये की आईटीसी वापस करने के लिए लिखित सहमति दी है।

पंजीकरण और जुर्माने की प्रक्रिया शुरू

राज्य कर विभाग ने बिना वैट पंजीकरण संचालित हो रहे प्रतिष्ठानों को तत्काल पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, नियमों के उल्लंघन के मामलों में विलंब शुल्क और अर्थदंड लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। इस कार्रवाई का उद्देश्य कर व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कारोबारियों को निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करना है। फिलहाल, जांच में सामने आए मामलों में कर देयता का आकलन और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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