देहरादून। राजधानी देहरादून के प्रतिष्ठित समरवैली पब्लिक स्कूल में छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। अभिभावकों ने स्कूल के एक फिजिक्स शिक्षक पर लंबे समय से छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत किए जाने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार को पीड़ित छात्रा और उसकी मां ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी, जिसके बाद मामला सार्वजनिक हो गया।
अभिभावकों के अनुसार, स्कूल में भृगु नाम के फिजिक्स शिक्षक पर छात्राओं के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करने के आरोप हैं। बताया गया कि यह सिलसिला करीब एक साल से चल रहा था। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि शिकायत मिलने के बाद भी स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया और आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
निदेशक पर भी अनुचित व्यवहार का आरोप
पीड़ित छात्रा और उसकी मां ने स्कूल के निदेशक बताए जा रहे अशोक वासु के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके आरोपों के मुताबिक, प्रिंसिपल कार्यालय में छात्रा से शिक्षक द्वारा कथित तौर पर किए गए स्पर्श को दोहराकर दिखाने के लिए कहा गया। आरोप है कि निदेशक ने छात्रा से यह भी पूछा कि क्या उसके पिता उसे इस तरह नहीं छूते। इसके बाद छात्रा की शिकायत को झूठा बताया गया।
पीड़ित छात्रा की मां का आरोप है कि मामले को संवेदनशीलता से संभालने और निष्पक्ष जांच कराने के बजाय इसे स्कूल परिसर से बाहर भी चर्चा का विषय बना दिया गया। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक नाबालिग छात्रा की शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय उसके साथ इस तरह का व्यवहार किया गया।
कोच से संपर्क और होटल में बैठक का भी दावा
पीड़ित परिवार के मुताबिक, छात्रा खेलों में गोल्ड मेडल जीत चुकी है और स्पोर्ट्स कॉलेज में अभ्यास के लिए जाती है। मां का आरोप है कि निदेशक को इस बारे में जानकारी थी और उन्होंने छात्रा के कोच प्रिंस विपिन को फोन कर मामले की जानकारी दी तथा इसे सुलझाने के लिए कहा। परिवार ने यह भी दावा किया कि मामले को लेकर होटल दीपशिखा में कुछ अन्य लोगों के साथ बैठक की गई।
स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी शिकायत पर तत्काल निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
फिलहाल, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। साथ ही, छात्रा की पहचान और निजता सुरक्षित रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शिकायत करने वाले बच्चे या परिवार पर किसी तरह का दबाव न बनाया जाए।
