Chardham Yatra : ​उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस साल अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। बदरी-केदार मंदिर समिति ने विजयादशमी (20 अक्टूबर 2026) के पावन अवसर पर चारों धामों के कपाट बंद होने का आधिकारिक शेड्यूल जारी कर दिया है। अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के खतरे के मद्देनजर हर साल की भांति इस बार भी शीतकाल के लिए कपाट लगभग छह महीने वास्ते बंद किए जा रहे हैं, हालांकि इस अवधि में भगवान के शीतकालीन गंतव्यों पर नियमित रूप से पूजा-पाठ जारी रहेगा।

​Chardham Yatra : किस धाम के कपाट कब होंगे बंद? (शेड्यूल)

  • ​गंगोत्री धाम: 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के पावन पर्व पर दोपहर 12:05 बजे।
  • ​यमुनोत्री धाम: 11 नवंबर को भैया दूज के दिन सुबह 10:28 बजे।
  • ​केदारनाथ धाम: 11 नवंबर को ही सुबह ठीक 8:30 बजे।
  • ​बद्रीनाथ धाम: 16 नवंबर को रात्रि 9:37 बजे। (नोट: कुछ ट्रैवल पोर्टल्स पर बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की तिथि 13 नवंबर बताई जा रही थी, लेकिन मंदिर समिति की ओर से घोषित पक्की तारीख 16 नवंबर ही है।)

​Chardham Yatra : बद्रीनाथ में 12 से 16 नवंबर तक के धार्मिक अनुष्ठान (पंच पूजा)

​महाकुंभ जैसी इस महान यात्रा के अंतिम पड़ाव पर बद्रीनाथ धाम में पांच दिनों तक खास परंपराएं निभाई जाएंगी:

  • ​12 नवंबर: गणेश मंदिर के कपाट भगवान गणेश की विशेष पूजा के साथ शीतकाल के लिए बंद होंगे।
  • ​13 नवंबर: आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे।
  • ​14 नवंबर: गर्भगृह के अंदर पवित्र वेद ऋचाओं का पाठ और खड्ग पुस्तक पूजन होगा।
  • ​15 नवंबर: माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग चढ़ाया जाएगा, जिसके बाद मुख्य पुजारी (रावल) उन्हें भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में विराजमान होने का न्योता देंगे।
  • ​16 नवंबर: मां लक्ष्मी की स्थापना गर्भगृह में होगी और फिर रात 9:37 बजे बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
  • ​17 नवंबर: अगले दिन उद्धव जी और कुबेर जी की उत्सव डोलियां आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगी, जबकि गरुड़ धाम ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर जाएगा।

​इसके अलावा, पंचकेदार में शामिल तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर को (डोली 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी) और मदमहेश्वर के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे (डोली 19 नवंबर को ऊखीमठ पहुंचेगी)।

​Chardham Yatra : सर्दियों में कहां होती है भगवान की पूजा?

​लगभग 3000 से 3600 मीटर ऊंचे धामों में बर्फबारी और ठंड के कारण मंदिर बंद होने के बाद मूर्तियों और डोलियों को नीचे लाया जाता है, जहां अगले छह महीने दर्शन और पूजा होती है:

  • ​यमुनोत्री: माता यमुना की डोली खरसाली गांव पहुंचती है।
  • ​गंगोत्री: मां गंगा की डोली मुखबा (मुखवा) गांव में विराजती है।
  • ​केदारनाथ: बाबा केदार की उत्सव डोली फाटा-गुप्तकाशी होते हुए ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर आती है।
  • ​बद्रीनाथ: शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर और जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में संपन्न होती है। जो लोग मुख्य सीजन में यात्रा नहीं कर पाए, वे इन शांत शीतकालीन स्थानों पर जाकर दर्शन का लाभ ले सकते हैं।

​Chardham Yatra : यात्रा पर निकलते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • ​पहले से करा लें बुकिंग: कपाट बंद होने से पहले पहाड़ों में भीड़ बढ़ सकती है, इसलिए होटल और गाड़ियों की एडवांस बुकिंग सुरक्षित रखें।
  • ​रजिस्ट्रेशन है जरूरी: यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य है, इसकी डिजिटल या हार्ड कॉपी हमेशा अपने पास रखें।
  • ​सही कपड़ों की पैकिंग: मौसम के मिजाज को देखते हुए थर्मल इनर, भारी विंटर जैकेट, ऊनी टोपियां, मोजे, दस्ताने और मजबूत ट्रेकिंग जूते साथ जरूर रखें।
  • ​सुबह की यात्रा बेहतर: पहाड़ों पर सुबह का मौसम आमतौर पर साफ रहता है, इसलिए दिन की शुरुआत जल्दी करें ताकि सफर सुगम रहे।
  • ​लचीला शेड्यूल रखें: अचानक बर्फबारी या बारिश से रास्ते प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए अपनी वापसी की योजना में एक दिन का अतिरिक्त समय लेकर चलें।

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