चमोली। उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। भगवान बदरी विशाल के दर्शन के लिए देशभर से तीर्थयात्री बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। बुधवार, 14 अक्टूबर तक धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 20 लाख 13 हजार 491 पहुंच गई है। खास बात यह है कि यात्रा सीजन समाप्त होने में अभी करीब एक माह का समय शेष है। ऐसे में श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सोमवार को 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
बदरीनाथ धाम में इन दिनों लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। सोमवार को कुल 10,436 श्रद्धालुओं ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए। इसके साथ ही इस वर्ष यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 20 लाख के पार पहुंच गया। यात्रियों की बढ़ती संख्या से धाम में रौनक बनी हुई है और मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही जारी है।
इस वर्ष बदरीनाथ धाम की यात्रा ने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि देखने को मिली है। पितृ पक्ष के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे, जिससे यात्रा को और गति मिली।
पितृ पक्ष में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पितृ पक्ष के दौरान बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल तीर्थ में पिंडदान और तर्पण करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचे। इस अवधि में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने धाम में दर्शन किए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर 10 अक्टूबर को करीब 28 हजार तीर्थयात्री बदरीनाथ पहुंचे थे। इससे धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बरकरार
बदरीनाथ धाम में मौसम लगातार ठंडा हो रहा है। सुबह और शाम के समय तापमान में गिरावट के कारण श्रद्धालुओं को सर्दी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद भगवान बदरी विशाल के दर्शन करने के लिए भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है।
यात्रा के करीब एक माह शेष रहने के कारण आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के पहुंचने की संभावना है। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने बदरीनाथ धाम की यात्रा को विशेष बना दिया है। अब सभी की नजरें यात्रा सीजन समाप्त होने तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के अंतिम आंकड़े पर टिकी हैं।
