देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून में प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवालों और कांग्रेस के आरोपों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछे जाने चाहिए, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरा रिकॉर्ड और तथ्य सामने रखना जरूरी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए तथ्यों और दस्तावेजों का आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी आंतरिक नोट को अंतिम निर्णय या किसी आपत्ति को संस्थागत विफलता के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर होने वाली चर्चाएं और अलग-अलग सुझाव निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।

सीएम ने कहा कि आयोग के तीनों आयुक्तों ने स्पष्ट किया है कि 24 जून 2025 को विशेष गहन पुनरीक्षण का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था। चुनाव आयोग ने भी एक दिन पहले स्पष्ट किया था कि आंतरिक टिप्पणियां विचार-विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और पिछले एक वर्ष में आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

धामी ने कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग को लेकर बनाए जा रहे नैरेटिव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों पर चर्चा तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए।

उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया फिलहाल जारी है। दावे और आपत्तियों की जांच के लिए अधिकारियों की ओर से विभिन्न जिलों में स्थलीय निरीक्षण भी किया जा रहा है। राज्य में SIR की अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।